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Success Stories

Real stories of impact and empowerment.

एक बार फिर से हम साथ..

दिनाँक 11.03.2023 को कुछ लोग केंद्र पर आये, उन्हें बैठाया गया उनसे केंद्र पर आने का कारण पूॅछा गया तो उन्होंनें बताया कि मैं ग्राम डिघिया से आया हूँ मेरे गाँव की आशा बहू ने मुझे इस केंद्र के बारे में जानकारी दी हैं तब परामर्शदात्री ने उन्हें विश्वास दिलाते हुए अपनी बात बताने को कहा तब उन्होंनें सबसे पहले अपना नाम राजकिशोर बताया और कहा कि मेरी शादी को 6 साल हो गए हैं लेकिन शादी के बाद सिर्फ 6 महीने तक मेरी पत्नी ठीक-ठाक से रही उसके बाद से मेरी पत्नी का अत्यधिक लड़ाई-झगड़ा करना और आए दिन मायके जाना रहता है मेरे घर में मैं और मेरी बूढ़ी माँ और मेरी पत्नी बस तीन ही लोग हैं और मैं बाहर लुधियाना में काम करता हूँ जब मै लुधियाना आ गया तब मेरी पत्नी अपने भाई के साथ ससुराल आ गयी लेकिन मेरी माँ से आए दिन लड़ाई-झगड़ा करती रही और मुझ पर शक करती थी क्यों की जब मैं लुधियाना में काम करता था तो बात करने का ज्यादा समय नहीं मिल पाता था जिससे मेरी पत्नी का शक बढ़ता ही गया और छोटी-छोटी बातों को ले करके लड़ाई-झगड़ा होने लगा मेरी माँ और मेरी पत्नी में एक दिन अत्यधिक लड़ाई-झगड़ा हुआ और मेरी पत्नी बिना मुझे बताये अपने मायके चली गई तब से कोई सम्पर्क नही हुआ अभी मैं होली में आया हूँ मैंने अपनी पत्नी को कई बार फोन किया लेकिन ना ही फोन उठा रही है और न कोई बात हुई तब मैं आपके पास आया हूँ और मैं अपनी पत्नी को अपने साथ रखना चाहता हूँ तब परामर्शदात्री ने उन्हें अपनी सारी बातों को लिखित में एक प्रार्थना पत्र देने को कहा और केंद्र की पूर्ण रूप से जानकारी दी राजकिशोर ने अपनी सारी समस्या को एक लिखित रूप में दिया परामर्शदात्री ने आगे की कार्यवाही करते हुए प्रतिवादिनी को फोन के माध्यम से वाद हेतु सूचित किया गया प्रतिवादिनी ने अपना पक्ष फोन पर ही स्पष्ट किया और कहा कि मैंने अपना वाद महिला थाने में कर दिया है और मैं आगे की कार्यवाही वहीं से करूॅंगी काउंसलर ने राजकिशोर को जानकारी दी कि आपकी पत्नी महिला थाने से ही अपना समझौता चाहती है दोंनों पक्ष महिला थाने में परामर्श सत्र के दौरान दोंनों उपस्थित हुए दोंनों से बात की गई दोंनों ने एक दूसरे से बात-चीत की परामर्शदात्री ने उनकी जिम्मेदारियों का अहसास करवाते हुए वैवाहिक पारिवारिक जीवन की जिम्मेदारियों से अवगत करवाया साथ ही दोंनों का निर्णय जाना गया प्रतिवादिनी ने बताया कि मैं वादी के साथ ससुराल जाना चाहती हूँ लेकिन अबकी बार मैं इनकी माँ के साथ नहीं रहूँगी । प्रतिवादी जहां काम करने जाएंगें वही मैं साथ रहूँगी वादी राजकिशोर इस बात पर सहमत हुए और अपनी पत्नी को ले जाने को कहा तब दोंनों लोंगों को डेट निर्धारित कर बताने को कहा गया महिला थाने की एस0 ओ0 रेखा सिंह ने दोंनों पक्षों से कहा कि सुलह समझौता होने के बाद अगर कोई समस्या आती है तो आप मुझे फोन करके बताएंगें परामर्शदात्री ने दोंनों को उनकी गलतियों का एहसास करवाया और पुनः अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने के लिए कहा गया और केंद्र पर आने को कहा गया दिनाँक 27.03.2023 को केन्द्र पर आये वादी ने बताया कि मैं प्रतिवादिनी को लेने उसके मायके गया था और इस समय हम दोनों के बीच में कोई मत-भेद नहीं है प्रतिवादिनी ने कहा कि हमें किसी से कोई शिकायत नहीं है लेकिन जो हो चुका है वह दोबारा न हो और मुझे खर्चे के लिए हर महीना कुछ पैसे दे तब वादी ने कहा कि मैं अभी बाहर नहीं जा रहा हूँ अभी मैं यहीं घर पर ही रह रहा हूँ अब कुछ काम यही करूँगा । और हर महीना 500 रूपये प्रतिवादिनी के खाते में जमा करूँगा दोनों एक दूसरे से राजी हुए दोंनों की सहमति से सुलह समझौता करवाया और केंद्र से पुनः विदाई करवाई गई दोंनों की सहमति से वाद को केंद्र से समाप्त कियागया।
नोट: सुरक्षा कारणों से नाम मे परिवर्तन किया गया है।
Story Date: June 11, 2023
Added: Jan 30, 2026
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एक पहल..

समूह की कार्यकर्ती के माध्यम से एक महिला अपने माता पिता के साथ केन्द्र पर आयी उन्हें बैठाया गया और उन्हें अपनी समस्या बताने को कहा गया तब उसने सबसे पहले अपना नाम रेनू बताया और कहा कि मेरी शादी को 8 साल हो गए हैं मैं पंजाब में रहती हूं, वही मेरी ससुराल है शादी के 2 साल तक बहुत अच्छे से मैं रही फिर धीरे-धीरे मुझे पता चला कि मेरे पति शराब पीते हैं और जब वह शराब पीते हैं तब लड़ाई-झगड़ा मार-पीट करते हैं मेरे 3 बच्चें है दो बच्चें मेरे पढ़ने जाने लगे और मैं यही सोचकर ससुराल में रहती थी की मेरे बच्चों के भविष्य को देखकर बच्चों की जिम्मेदारी को समझेंगे हो सकता मेरेे पति में सुधार हो जाएं लेकिन फिर भी मेरे पति में कोई सुधार नही हुआ वह रोज का रोज ऐसे ही शराब पीकर के बिगड़ते रहे और मेरे साथ मार-पीट करते रहे अपनी परेशानी को हमने अभी तक किसी से नहीं बताया न ससुराल में न मायके लेकिन इस बार मैं बीमार थी और कुछ काम घर का नहीं कर पा रही थी तो मेरे पति आकर मुझे बिना वजह मारने लगे तब मैंने अपने मायके को फोन किया और मेरे चाचा और मेरे पापा मुझे लेने पंजाब गये तब मैं अपने पापा और चाचा के साथ मायके आ गई मैंके आए हुए मुझे दो महीना हो गए हैं जब मैं मैके आने लगी थी तब मेरे दो बच्चों को वहीं मेरे पति ने मुझसे जबरदस्ती ले लिया था और एक बच्चे को मैं अपने साथ लाई हूँ जब मैं फोन करती तब मुझसे कभी सही से बात नहीं करते अभी मैं अपने मायके में ही हूँ मैं उनके साथ नहीं जाऊॅगीं मेरे बच्चों को मुझे दे दें मैं अपना भविष्य कोई भी काम करके गुजार लूँगी लेकिन मैं वहाँ नहीं जाऊॅगी। परामर्शदात्री ने उनकी सारी बातों को सुना और उन्हें विश्वास दिलाते हुए केंद्र कि प्रक्रिया के बारे में बताया और कहा तब रेनू ने लिखित में प्रार्थाना पत्र दिया। परामर्शदात्री ने फिर आगे की कार्यवाही करते हुए प्रतिवादी को फोन किया और उन्हें वाद हेतु जानकारी दी वह जल्द से जल्द केंद्र पर आकर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया। दिनाँक 12.02.2023 को प्रतिवादी केंद्र पर आए उन्हें बैठाया गया और अपना पक्ष बताने को कहा गया प्रतिवादी ने अपना नाम राजेंद्र बताया और कहा कि मेरी पत्नी से कोई लड़ाई- झगड़ा नहीं हुआ था वह अपने मन से अपने मायके आ गई और मैं वहाँ बच्चे की देख-भाल कर रहा हूँ अकेले बना खिला रहा हूँ मेरी बूढ़ी माँ है जो कि उनसे काम नहीं हो पाता और मैं कभी-कभी शराब पीता हूँ लेकिन मैं अपनी गलती मान कर शराब छोड़ने की कोशिश करूॅगा और अपनी पत्नी को अपने साथ ले जाऊॅगा प्रतिवादी राजेंद्र की बातों को सुना और दोंनों को संयुक्त वार्ता हेतु केंद्र पर बुलाया गया दोनों केन्द्र पर आये ,दोंनों की वार्ता करवाते हुए दोंनों ने आपस में बात-चीत की काउंसलर ने दोंनों पक्षों को सुना और उनकी गलतियों का एहसास करवाया साथ ही प्रतिवादी को नशा उन्मूलन केंद्र के बारे में जानकारी दी। दोनों का निर्णय जाना गया वादिनी ने कहा कि प्रतिवादी मेरे साथ मेरे मैके में कुछ दिन रहे जब मुझे विश्वास हो जाऐगा कि अब शराब को छोड़ने कि पूरी कोशिश कर रहे है। तब मैं इनके साथ ससुराल चली जाऊँगी । दोंनों एक दूसरे की बातों से सहमत हुए और वादिनी के मायके में रहने को राजी हुए दोनों को केंद्र से कुछ दिन का समय दिया गया और केंद्र पर बुलाया गया 6 दिन बीत जाने के बाद रेनू का फोन केंद्र पर आया उन्होंनें बताया कि अभी तक प्रतिवादी ने शराब तो नहीं पिया है और लड़ाई झगड़ा भी नहीं किया लेकिन मेरे बेटे की तबियत खराब है जो मेरी साॅस के पास है और वो कोई काम भी नही कर पाती है जिसके लिए मैं आज ही जाना चाहती हूॅ दोंनों को केंद्र पर पुनः बुलाया गया दोंनों एक दूसरे के साथ रहने को राजी हुए और जो गलतियां हो गई उन्हें न दोहराने की बात कही । दोंनों को पारिवारिक वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों के बारे में बताया गया दोंनों की विदाई केंद्र से करवाई गई एक सप्ताह बाद वादिनी का फोन केन्द्र पर आया दोंनों ने बताया कि अब हम लोंगों के बीच में कोई मत-भेद नहीं है दोंनों अपनी-अपनी जिम्मेंदारियों को पूरा कर रहें हैं। रेनू ने कहा कि केंद्र कि एक पहल से आज मेरा जीवन सुधार पा रहा है।
Story Date: April 12, 2023
Added: Jan 30, 2026
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